An awesome Shayari

Shayari, being my hobby, I would like to dedicate my first blog to Shayari… Though I have not created it, this one is my favorite… I am sure you will love this too…

दो जवां दिलो का ग़म दूरिया समझती हैं,
कौन याद करता है ये हिचकिया समझती हैं।
तुम तो खुद ही कातील हो तुम यह बात क्या जानो,
क्यों हुआ मैं दीवाना ये वादिया समझती हैं।
बाम से उतरती है जब हसीन दोशीजा,
जिस्म की नजाकत को ये सीढियां समझती हैं।
यूँ तो शहरे गुलशन को कितने लोग आते है,
फूल कौन तोड़ेगा ये डालिया समझती है।
जिसने कर लिया दिल में पहली बार घर दनिश,
उसको मेरी आँखों की पुतलिया समझती हैं।


Hmm I know there are some fundoo Urdu words…. Don’t worry I am here to explain ;)

बाम: Terrace
दोशीजा: Mistress
दनिश: Hacking (Ghar ya dil pe kabza)


These two are my most favorite lines

बाम से उतरती है जब हसीन दोशीजा,
जिस्म की नजाकत को ये सीढियां समझती हैं।


There are some my creations as well which I will post in later posts... Enjoy and don't forget to say वाह वाह :)

3 comments:

Vikash Kumar said...

waah waah waah waah!! subhan allah.. masha allah.. Mukarrar mukarrar :)

Anonymous said...

Kya bat hai.. Wah Wah!.. Mukarrar mukarrar :)

Pushkar Kumar said...

Shukriya shukriya :)