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काश इन आँखों के अश्क छुप जाते कभी कभी

काश इन आँखों के अश्क छुप जाते कभी कभी...
हम चाह के भी ना रो पाते कभी कभी...

यूँ तो आदत नहीं थी रोने की बार बार हमे....
बस हालात नम कर जाती है पलके कभी कभी...

हमे इल्म ना हुआ कब छुट गया काफूर...
ख्वाबों में उनका इस्तेकबाल होता है कभी  कभी...

काश इन आँखों के अश्क छुप जाते कभी कभी ...
हम चाह के भी ना रो पाते कभी कभी... 
हम चाह के भी ना रो पाते कभी कभी...

~ पुष्कर कुमार

Ek anjani si parchai dikhai deti hai

Tanhaiyon me aksar ek goonj sunai deti hai, describes feeling of a person, who is apart from their loved one, and waiting for them.

तनहाइयों में असकर एक गूँज सुनाई देती है,
एक अनजानी सी परछाई दिखाई देती है...

उनकी निगाहों में दिखती है हमे एक हसीन दुनिया,
अब तो उनकी तस्वीर ज़र्रे ज़र्रे में दिखाई देती है

तनहाइयों में असकर एक गूँज सुनाई देती है,
एक अनजानी सी परछाई दिखाई देती है...

वो पायल का छनकना वो कंगन का खनकना,
उनकी मीठी बातों की एक धीमी लय सुनाई देती है…

तनाइयों में असकर एक गूँज सुनाई देती है,
एक अनजानी सी परछाई दिखाई देती है...

याद नहीं कब देखा था उनको आखिर बार…
पर फिर मिलने की एक उम्मीद हर वक़्त दिखाई देती है…

तनहाइयों में असकर एक गूँज सुनाई देती है,
एक अनजानी सी परछाई दिखाई देती है...
एक अनजानी सी परछाई दिखाई देती है...

Shayari collection

Few Shayari from my collection...
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पैमाने बने थे चल रहा था जाम का था दौर...
कितने पीते गये हम उनकी याद में ये किसने किया था गौर...
हर पैमाना भरा था मेरे टूटे हुए ख्वाबो से...
पर हमारे यार कह रहे थे एक और, बस एक
और....
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उनकी सादगी ने हमे यूँ दीवाना बना दिया…..
हर छोटी मुलाकात को एक प्यारा अफसाना बना दिया….
जब हमने उनसे पूछा की ये चाँद कैसा दिखता है…
उन्होंने अपने रुख से हसीं जुल्फों को हटा दिया…

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I will keep on posting, till then keep saying wah wah ;)

An awesome Shayari

Shayari, being my hobby, I would like to dedicate my first blog to Shayari… Though I have not created it, this one is my favorite… I am sure you will love this too…

दो जवां दिलो का ग़म दूरिया समझती हैं,
कौन याद करता है ये हिचकिया समझती हैं।
तुम तो खुद ही कातील हो तुम यह बात क्या जानो,
क्यों हुआ मैं दीवाना ये वादिया समझती हैं।
बाम से उतरती है जब हसीन दोशीजा,
जिस्म की नजाकत को ये सीढियां समझती हैं।
यूँ तो शहरे गुलशन को कितने लोग आते है,
फूल कौन तोड़ेगा ये डालिया समझती है।
जिसने कर लिया दिल में पहली बार घर दनिश,
उसको मेरी आँखों की पुतलिया समझती हैं।


Hmm I know there are some fundoo Urdu words…. Don’t worry I am here to explain ;)

बाम: Terrace
दोशीजा: Mistress
दनिश: Hacking (Ghar ya dil pe kabza)


These two are my most favorite lines

बाम से उतरती है जब हसीन दोशीजा,
जिस्म की नजाकत को ये सीढियां समझती हैं।


There are some my creations as well which I will post in later posts... Enjoy and don't forget to say वाह वाह :)